संपादक परंपरा का हाल पवित्र नदियों मेंं प्रदूषण सरीखा

संपादक माने किसी अखबार का ब्रह‍मा या किसी शरीर का मस्तिष्क ऐसा माना जाता था, लेकिन आज के दौर में यह बात अतीत का एक संवाद भर रह गई है। आज का संपादक असल में मैनेजर की भूमिका में ज्यादा है, संपादन की भूमिका में काफी कम। यह अतिसंयोक्ति नहीं...

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